सड़क पर गायों का कब्जा, रुकती सांसें-थमती रफ्तार: पलारी के मेन रोड पर हर दिन हादसे का खतरा, न जिम्मेदार अधिकारी जागे न व्यवस्था संभली

TOSHAN PRASAD CHOUBEY

April 1, 2026


बलौदा बाजार-रायपुर मेन रोड, जो इलाके की सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण सड़क मानी जाती है, पलारी के बृजलाल वर्मा कॉलेज के पास इन दिनों अपनी अलग ही पहचान बना चुकी है। यहां ट्रैफिक से ज्यादा “गौ ट्रैफिक” हावी नजर आता है। रोजाना 30 से 40 गायों का झुंड सड़क के बीचों-बीच इस तरह जमा रहता है, मानो यह उनका स्थायी अधिकार क्षेत्र हो।

यह मार्ग सिर्फ आम आवाजाही का रास्ता नहीं है, बल्कि तहसील कार्यालय, बीईओ ऑफिस और बीआरसीसी ऑफिस जैसे महत्वपूर्ण शासकीय दफ्तरों तक पहुंचने का मुख्य मार्ग भी है। दिनभर लोगों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन यहां पहुंचते ही हर किसी को अनचाहे “इंतजार” का अनुभव करना पड़ता है—पहले गायें हटेंगी, फिर रास्ता मिलेगा।

हालात ऐसे हैं कि राहगीरों और वाहन चालकों को रुककर इंतजार करना पड़ता है और फिर बेहद सावधानी से निकलना पड़ता है। सड़क का एक बड़ा हिस्सा लगभग गायों के कब्जे में रहता है, जिससे ट्रैफिक एक तरफ सिमट जाता है। ऐसे में यह रास्ता अब आम सड़क कम और “रोज का रिस्क जोन” ज्यादा बन गया है।

इस लापरवाही का असर भी साफ नजर आ रहा है। इस मार्ग पर कई लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं। तेज रफ्तार और अचानक सामने बैठी गायों के कारण वाहन चालक संतुलन खो देते हैं। वहीं कई गायें भी वाहनों की चपेट में आकर घायल हुई हैं और कई ने सड़क पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। फर्क बस इतना है कि इंसान को एम्बुलेंस मिल जाती है, जबकि गायों के लिए सड़क ही अंतिम ठिकाना बन जाती है।

हैरानी की बात यह है कि इस समस्या में सिर्फ जिम्मेदार अधिकारी ही नहीं, आम लोग भी कहीं न कहीं जिम्मेदार नजर आते हैं। कई वाहन चालक तेज रफ्तार में निकलने की कोशिश करते हैं, जबकि जरूरत पड़ने पर कोई रुककर गायों को हटाने की कोशिश नहीं करता।

छत्तीसगढ़ सरकार की ‘गौधाम योजना’ कागजों में जरूर मौजूद है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई देती है। अगर योजना सही तरीके से लागू होती, तो आज गायें सड़कों पर इस तरह नहीं बैठतीं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर गायें जाएं तो जाएं कहां?

अब वक्त आ गया है कि सिर्फ योजनाओं की बात नहीं, बल्कि जमीन पर काम हो। गौशाला की ठोस व्यवस्था लागू की जाए, जिम्मेदारी तय हो और इस व्यस्त मार्ग को सुरक्षित बनाया जाए। वरना यह “गौ चौपाल” किसी दिन बड़ी दुर्घटना की वजह बन सकती है।

फिलहाल, इस सड़क से गुजरने वालों के लिए यही सलाह है—यहां नियमों से ज्यादा धैर्य जरूरी है, क्योंकि इस मार्ग पर अब ट्रैफिक नहीं, “गौ ट्रैफिक” चलता है।

प्रबंध संपादक (Managing Editor)

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