
रिपोर्टर टेकराम कोसले
गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के तहत बन रही सड़कों में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से गुणवत्ता से समझौता कर करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाया जा रहा है।
घटिया मटेरियल से हो रहा निर्माण
मैनपुर ब्लॉक के चीहीमुड़ा, सागड़ा, काण्डसर से कटा सेमल और चिटकीमुड़ा तक लगभग 3-3 किलोमीटर की अलग-अलग सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि शुरू से ही सड़क निर्माण में निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग किया गया।
बताया जा रहा है कि:
मुरमी की जगह मिट्टी जैसे कमजोर पदार्थ का उपयोग
स्थानीय स्तर की घटिया गिट्टी का इस्तेमाल
पानी का पर्याप्त छिड़काव (तराई) नहीं किया गया
रोलर से ठीक से दबाव (कम्पैक्शन) नहीं किया गया
डामरीकरण में भी भारी लापरवाही
ग्रामीणों के अनुसार डामरीकरण के दौरान भी मानकों का पालन नहीं किया गया। हल्के स्तर का मटेरियल उपयोग कर औपचारिकता निभाई गई, जिसके कारण कुछ ही महीनों में सड़क की हालत खराब हो गई है।
यह स्थिति केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की उस मंशा के विपरीत है, जिसमें उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली सड़कों के निर्माण के सख्त निर्देश दिए हैं।
CBR टेस्टिंग सिर्फ कागजों तक सीमित
नियमों के अनुसार सड़क निर्माण से पहले मटेरियल की CBR टेस्टिंग अनिवार्य होती है, लेकिन यहां यह प्रक्रिया केवल कागजों तक ही सीमित रही। जमीनी स्तर पर गुणवत्ता की पूरी तरह अनदेखी की गई।
मैटेरियल कंट्रोल ऑफिसर रहते हैं गायब
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान मैटेरियल कंट्रोल ऑफिसर अक्सर मौके से नदारद रहते थे।
WMM कार्य के दौरान भी अनुपस्थित
डामरीकरण के समय भी नहीं दिखे
इस लापरवाही के कारण ठेकेदार के कर्मचारियों ने खुलेआम सामग्री में हेराफेरी (कांटा मारना) की, जिससे सड़क की गुणवत्ता और गिर गई।
गारंटी पीरियड से पहले ही दम तोड़ रही सड़कें
ग्रामीणों का कहना है कि सड़कें गारंटी अवधि से पहले ही खराब हो जाती हैं। बाद में मेंटेनेंस के नाम पर लीपापोती कर भ्रष्टाचार को छुपा दिया जाता है।
अधिकारियों पर संरक्षण देने का आरोप
ईई, एसडीओ और इंजीनियरों पर आरोप है कि वे ठेकेदार को संरक्षण दे रहे हैं। गुणवत्ता सुधारने के बजाय वे अनदेखी कर रहे हैं, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
कलेक्टर से कार्रवाई की उम्मीद
इस मामले में पहले भी शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब वर्तमान कलेक्टर भगवान सिंह उइके से ग्रामीणों और आम जनता को उम्मीद है कि वे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेंगे।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का उद्देश्य गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी देना है, लेकिन मैनपुर में यह योजना भ्रष्टाचार का जरिया बनती दिख रही है। यदि समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो करोड़ों की यह परियोजना पूरी तरह विफल हो सकती है।