विकासखंड पलारी के ग्राम गिधपुरी, सहाडा, भरूवाडीह, भवानीपुर, खपरी, वटगन, ओडान, दतरेंगी, कुसमी, घोटिया, बिनौरी और सेमरिया सहित कई इलाकों में अवैध ईंट भट्ठों का धुआं अब सिर्फ हवा नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी में जहर घोल रहा है। सड़कों के किनारे धड़ल्ले से चल रहे ये भट्ठे मानो कानून और प्रशासन दोनों को खुली चुनौती दे रहे हैं।
ग्रामीणों की आंखों में जलन है, सांसों में घुटन है, खेतों में बर्बादी है—लेकिन प्रशासन की आंखें अब भी बंद हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक? क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों का दर्द अब गुस्से में बदल चुका है। उनका कहना है कि भट्ठों से निकलने वाला जहरीला धुआं बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ कर रहा है। खेतों पर गिरती राख फसलों को बर्बाद कर रही है, किसानों की मेहनत को राख में बदल रही है। क्या यही विकास है?
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई जगहों पर बिना अनुमति के हरे-भरे पेड़ों की कटाई कर इन्हीं भट्ठों में झोंका जा रहा है। एक ओर सरकार पेड़ लगाने की बात करती है, दूसरी ओर खुलेआम हरियाली का कत्ल हो रहा है—और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
हालांकि, कागजों में कार्रवाई जरूर दिखती है। ग्राम धमनी में 10 लाख 30 हजार ईंटों की जब्ती कर प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी पूरी होने का दावा कर लिया, लेकिन बाकी क्षेत्रों में जारी इस खुले खेल पर चुप्पी आखिर क्यों? क्या यह केवल दिखावटी कार्रवाई थी?
ग्रामीणों का साफ कहना है—अब और नहीं। बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि या तो प्रशासन बेपरवाह है या फिर किसी दबाव में है। दोनों ही स्थिति में सबसे बड़ी कीमत आम जनता चुका रही है।
क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन अवैध भट्ठों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। क्योंकि अब यह सिर्फ प्रदूषण का मुद्दा नहीं, बल्कि जीवन और भविष्य की लड़ाई बन चुका है।
इस पूरे मामले में नायब तहसीलदार पलारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन न उठाना भी कई सवाल खड़े करता है—क्या प्रशासन सच से भाग रहा है?