ब्राह्मण मातृशक्ति परिषद् ने कराया 31 ब्राह्मण बटुकों का उपनयन संस्कार

SARJU PRASAD SAHU

February 19, 2026

रतनपुर। छत्तीसगढ़ की धार्मिक नगरी रतनपुर में गुरुवार को 31 ब्राह्मण बटुकों का सामूहिक उपनयन संस्कार विधि-विधान से संपन्न कराया गया। यह आयोजन उत्कृष्ट ब्राह्मण सामाजिक संगठन समग्र ब्राह्मण परिषद् छत्तीसगढ़ की बिलासपुर मातृशक्ति परिषद् इकाई द्वारा श्री महामाया मंदिर परिसर स्थित सत्संग मंडप में आयोजित किया गया।

 

पहली बार प्रदेश स्तरीय सामूहिक आयोजन

मातृशक्ति परिषद् की जिलाध्यक्ष श्रीमती रमा दीवान एवं जिला सचिव श्रीमती अंजू शर्मा ने बताया कि रतनपुर में पहली बार एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय सामूहिक उपनयन संस्कार का आयोजन किया गया। शुभ मुहूर्त में 19 फरवरी को 31 बटुकों को जनेऊ धारण कराया गया।

सनातन धर्म में वर्णित सोलह संस्कारों में उपनयन संस्कार को विशेष स्थान प्राप्त है। इसे यज्ञोपवीत संस्कार भी कहा जाता है। उपनयन का शाब्दिक अर्थ है—अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना। जनेऊ धारण करने के साथ ही बालक को यज्ञ, स्वाध्याय एवं वैदिक अध्ययन का अधिकार प्राप्त होता है।

 

वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई प्रक्रिया

आचार्यों के निर्देशन में मंडप में देव पूजन के उपरांत तेलमाटी, मंडपाच्छादन, हरिद्रालेपन, चिकट एवं मातृका पूजन की विधियां संपन्न हुईं। इसके पश्चात सभी बटुकों का मुंडन संस्कार कराया गया। स्नान के बाद अष्ट ब्राह्मण भोज की परंपरा निभाई गई।

आचार्यों ने पलाश दंड धारण कराए बटुकों को जनेऊ पहनाकर सूर्यनारायण के दर्शन कराए तथा प्रत्येक बटुक को कान में गायत्री मंत्र की दीक्षा दी। संस्कारोपरांत बटुकों ने “भवति भिक्षां देहि” कहकर भिक्षा ग्रहण की, जो ब्रह्मचर्य आश्रम की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है।

बारात एवं धार्मिक उत्साह

संस्कार पूर्ण होने के बाद बटुकों ने नवीन वस्त्र धारण किए। मंदिर परिसर में गाजे-बाजे और आतिशबाजी के साथ उनकी प्रतीकात्मक बारात निकाली गई। प्रतिनिधि यजमान के रूप में श्रीमती शशि द्विवेदी एवं पं. राघवेन्द्र द्विवेदी ने पूजन संपन्न कराया।

सांस्कृतिक संरक्षण का संकल्प

प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती प्रमिला तिवारी एवं प्रदेश सचिव सजल तिवारी ने कहा कि उपनयन संस्कार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को दिशा देने का संकल्प है। दीक्षा का अर्थ है—जीवन को उद्देश्य और अनुशासन प्रदान करना। सामूहिक आयोजन का उद्देश्य समाज में धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण तथा एकता को सुदृढ़ करना है।

प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती सरोज तिवारी एवं संगठन विस्तार प्रमुख श्रीमती उमा शुक्ला ने बताया कि यह आयोजन का पहला वर्ष है, जिसमें रायपुर, अंबिकापुर, पेन्ड्रा, जांजगीर-चांपा, सक्ती, कोरबा, बलौदाबाजार सहित विभिन्न जिलों से बटुक शामिल हुए।

आचार्यों एवं पदाधिकारियों की उपस्थिति

उपनयन संस्कार को आचार्य पं. दुर्गा शंकर दुबे, पं. कपिल देव पांडेय, आचार्य डॉ. राजेन्द्र कृष्ण पांडेय, पं. दीपक दुबे, पं. महेन्द्र पांडेय सहित आठ ब्राह्मणों ने संपन्न कराया।

मंच संचालन डॉ. भावेश शुक्ला “पराशर”, श्रीमती श्वेता शर्मा एवं पं. श्रीकांत तिवारी ने किया।

प्रातः 8 बजे से सायं 6 बजे तक चले इस आयोजन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए सामाजिक प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम स्थल पर दिनभर वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक वातावरण बना रहा, जिसकी उपस्थित जनों ने सराहना की।

सह संपादक

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