प्रधानमंत्री आवास और मनरेगा में फर्जीवाड़े की बड़ी शिकायत, फर्जी जिओ टैग से आवास पूर्ण दिखाकर कर दिया भुगतान, शिकायत के बाद भी कार्यवाही नहीं, जिला प्रशासन पर उठे सवाल

SARJU PRASAD SAHU

December 29, 2025

कोरबा। छत्तीसगढ़ सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं। ताजा मामला कोरबा जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत कुकरीचोली से सामने आया है, जहां अपूर्ण आवासों को फर्जी जियो टैग के जरिए पूर्ण दिखाकर राशि का बंदरबांट कर लिया गया। ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर जनदर्शन में कई बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं होना जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

अपनों को फायदा पहुंचाने नियमों की अनदेखी

पंचायत में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि सरपंच के करीबी रिश्तेदारों को लाभ दिलाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सहायक और आवास मित्र की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है। अपूर्ण आवासों को ऑनलाइन रिकॉर्ड में ‘पूर्ण’ दिखा दिया गया है, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है।

फर्जी जियो टैग और मस्टररोल का खेल

जांच में दो प्रमुख मामले सामने आए हैं जो भ्रष्टाचार की पुष्टि करते हैं।मुरलीधर कंवर: सरपंच के करीबी रिश्तेदार मुरलीधर कंवर का आवास आज भी अधूरा है। खुद हितग्राही ने स्वीकार किया कि बरसात के कारण काम रुका हुआ है, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में इसे पूर्ण दिखाकर मनरेगा की राशि भी आहरित कर ली गई है।

गणेश सिंह कंवर: हितग्राही गणेश सिंह कंवर के पिता विष्णु सिंह ने बताया कि राशि की कमी से उनका घर अधूरा पड़ा है। लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड में किसी दूसरे घर की फोटो (फर्जी जियो टैग) अपलोड कर भुगतान प्राप्त कर लिया गया है।

“मेरा घर अधूरा है, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड में इसे किसी और घर की फोटो दिखाकर पूर्ण बता दिया गया है। हमें मेहनत की पूरी राशि भी नहीं मिली।  विष्णु सिंह, हितग्राही के पिता

जिम्मेदारों के विरोधाभासी बयान

हैरानी की बात यह है कि इस मामले में विभाग के कर्मचारी ही एक-दूसरे के बयानों को काट रहे हैं प्रद्युम्न कुमार लाल (रोजगार सहायक): इन्होंने स्वीकार किया कि मुरलीधर कंवर का आवास वास्तव में अधूरा है, लेकिन ऑनलाइन वह पूर्ण दिख रहा है।आवास मित्र: इनका दावा है कि आवास पूर्ण हो चुका है। कलेक्टर जनदर्शन की शिकायतों पर नहीं हो रही सुनवाई।

गांव के जागरूक युवाओं और ग्रामीणों ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ दो से अधिक बार कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई है। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि आवास और मनरेगा के मामलों में गड़बड़ी मिलने पर कड़ी कार्यवाही की जाए, लेकिन कुकरीचोली मामले में अधिकारियों की चुप्पी दोषियों को संरक्षण देने जैसी प्रतीत हो रही है।

फर्जी मस्टररोल के जरिए चहेतों के खातों में पैसे डालना और अधूरे निर्माणों को पूर्ण दिखाना न केवल वित्तीय अनियमितता है, बल्कि उन गरीब परिवारों के साथ खिलवाड़ है जो अपने पक्के घर का सपना देख रहे हैं। अब देखना यह है कि खबर सुर्खियों में आने के बाद जिला प्रशासन जागता है या भ्रष्टाचार का यह सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।

संपादक { विज्ञापन‍ }

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