
रिपोर्टर टेकराम कोसले
छत्तीसगढ़ में पुलिस और पत्रकारों के बीच टकराव के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं, जिनसे कानून व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक मामला बलरामपुर जिले के बसंतपुर थाना से जुड़ा है, जबकि दूसरा कोरिया जिले के सोनहत थाना का है।
बसंतपुर थाना प्रभारी पर रिश्वतखोरी का आरोप, पत्रकार को नोटिस
बलरामपुर जिले के बसंतपुर थाना प्रभारी पर चोरी के एक मामले में आरोपियों को छोड़ने और अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले को लेकर एक समाचार प्रकाशित किया गया, जिसके बाद क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली को लेकर चर्चा तेज हो गई।
खबर के प्रकाशन के बाद थाना प्रभारी ने संबंधित समाचार को भ्रामक और निराधार बताते हुए पत्रकार राम हरी गुप्ता को नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि इस खबर से शासकीय सेवक की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। पत्रकार को तीन दिनों के भीतर थाना उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है, अन्यथा वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
उठ रहे सवाल
क्या किसी आरोपित अधिकारी को स्वयं नोटिस जारी करने का अधिकार है?
क्या यह पत्रकार की आवाज दबाने का प्रयास है?
स्थानीय नागरिकों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सोनहत में पत्रकार से मारपीट, FIR दर्ज करने से इनकार
दूसरा मामला कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र का है, जहां पत्रकार शैलेश गुप्ता पर जानलेवा हमला किया गया। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने सार्वजनिक स्थान पर लोहे की रॉड, डंडे और धारदार हथियारों से हमला किया, जिससे पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गए।
पीड़ित पत्रकार जब शिकायत दर्ज कराने थाना पहुंचे, तो आरोप है कि:
FIR दर्ज नहीं की गई
पुलिस स्टाफ ने सादे कागज पर बयान लिया
पीड़ित और परिजनों से अभद्र व्यवहार किया गया
इस मामले में पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक (SP) से शिकायत की है, जिस पर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया है।
क्या है हमले की वजह?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह मामला पशु तस्करी से जुड़ा बताया जा रहा है। पत्रकार द्वारा इस मुद्दे पर सोशल मीडिया (व्हाट्सएप) में पोस्ट करने के बाद ही उन पर हमला किया गया।
पत्रकारों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इन दोनों घटनाओं के बाद पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर चिंता बढ़ गई है। सवाल उठ रहा है कि:
क्या सच लिखना अब जोखिम भरा हो गया है?
क्या पुलिस का दुरुपयोग कर दबाव बनाया जा रहा है?
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और पत्रकार संगठनों ने मांग की है कि:
दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच हो
दोषी पुलिस अधिकारियों और हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
कानून सबके लिए बराबर
विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतंत्र में पुलिस और मीडिया दोनों की अहम भूमिका है। ऐसे में पारदर्शिता, जिम्मेदारी और कानून का समान पालन जरूरी है।