
रिपोर्टर टेकराम कोसले
कोरबा । नगर पालिका दीपका में विकास कार्यों के नाम पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। वार्ड क्रमांक 01 के पार्षद कमलेश जायसवाल ने स्ट्रीट लाइट स्थापना के 84 लाख रुपये के टेंडर में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए राज्य के मुख्य सचिव को लिखित शिकायत भेजी है।
घटिया निर्माण और सुरक्षा से खिलवाड़ के आरोप
पार्षद ने अपनी शिकायत में अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कई गंभीर बिंदु उठाए हैं। उनका कहना है कि स्ट्रीट लाइट पोल लगाने में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। खंभों की मजबूती के लिए जरूरी कंक्रीट (PCC) का उपयोग नहीं किया गया, जिससे भविष्य में हादसों की आशंका बढ़ गई है।
इसके अलावा, टेंडर में प्रस्तावित 100 वॉट की ब्रांडेड लाइटों की जगह 50 से 70 वॉट की सस्ती और गैर-मानक लाइटें लगाई जा रही हैं। पोल की गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप नहीं बताई गई है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी
पार्षद ने यह भी आरोप लगाया कि बिजली केबल को निर्धारित 40 से 90 सेंटीमीटर गहराई के बजाय महज 10 सेंटीमीटर पर ही दबा दिया गया है। साथ ही, करंट से सुरक्षा के लिए जरूरी अर्थिंग और MCCB जैसे उपकरण भी नहीं लगाए गए हैं, जो सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है।
30-40% कमीशनखोरी का दावा
कमलेश जायसवाल का दावा है कि इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक कमीशनखोरी हुई है। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार निवारण कानून का उल्लंघन बताते हुए उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इंजीनियर पर जानकारी छुपाने का आरोप
मामले में नया मोड़ तब आया जब पार्षद ने नगर पालिका के इंजीनियर सिरिल भास्कर पापुला से कार्य की गुणवत्ता और मात्रा की जानकारी मांगी। आरोप है कि इंजीनियर ने जानकारी देने से इनकार कर दिया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
लोक आयोग में जांच की मांग
पार्षद ने छत्तीसगढ़ लोक आयोग अधिनियम 2002 की धारा 9 के तहत प्रारंभिक और पूर्ण जांच की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मामले को और उच्च स्तर तक ले जाएंगे।

ठेका रद्द करने और धन वसूली की मांग
पार्षद ने मांग की है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए ठेका निरस्त किया जाए और सरकारी धन की वसूली की जाए। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों से जानकारी छुपाना और कार्यों में पारदर्शिता का अभाव, भ्रष्टाचार की ओर स्पष्ट संकेत है।
अब देखना होगा कि मुख्य सचिव कार्यालय इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाता है और क्या इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।