
बिलासपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर दो दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। धरना समाप्ति के बाद प्रदर्शनकारियों ने कोंहेर गार्डन से कलेक्ट्रेट तक विशाल रैली निकालकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
रैली के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए अपनी लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर के माध्यम से शासन को ज्ञापन प्रेषित किया।
ज्ञापन के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से आगामी विधानसभा बजट में उनकी मांगों को शामिल करने की अपील की है।
50 वर्ष पुरानी योजना, फिर भी न्यूनतम मानदेय
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत 2 अक्टूबर 1975 से आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं और योजना 50 वर्ष पूर्ण कर चुकी है। इसके बावजूद प्रदेश में कार्यरत एक लाख से अधिक कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को न्यूनतम पारिश्रमिक और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार वर्तमान में कार्यकर्ताओं को 4,500 रुपये तथा सहायिकाओं को 2,250 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जो वर्तमान महंगाई के अनुरूप अत्यंत कम है।
प्रमुख मांगें
सेवानिवृत्ति पर कार्यकर्ताओं को 5 लाख एवं सहायिकाओं को 4 लाख रुपये ग्रेच्युटी
कार्यकर्ताओं को 10,000 रुपये एवं सहायिकाओं को 8,000 रुपये मासिक पेंशन
समूह बीमा योजना का लाभ
शासकीय कर्मचारी का दर्जा
नियमितीकरण तक 26,000 रुपये (कार्यकर्ता) एवं 22,100 रुपये (सहायिका) प्रतिमाह मानदेय स्वीकृत किया जाए
जिला अध्यक्ष श्रीमती कोमल ने कहा कि जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होता , हम अपने हक की संवैधानिक लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे।
उपस्थित प्रदर्शनकारियों ने शासन से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा जताते हुए कहा कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।