प्रशासनिक उदासीनता: कसडोल के ग्राम रंगोरा में ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ का नहीं मिल रहा लाभ, गर्भवती महिलाएं परेशान

BIRENDRA KUMAR SEN

March 12, 2026

प्रशासनिक उदासीनता: कसडोल के ग्राम रंगोरा में ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ का नहीं मिल रहा लाभ, गर्भवती महिलाएं परेशान

बलौदाबाजार/कसडोल: केंद्र सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं को बेहतर पोषण और आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई जा रही ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ बलौदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड में दम तोड़ती नजर आ रही है। ग्राम पंचायत रंगोरा की दर्जनों गर्भवती महिलाएं इस महत्वपूर्ण योजना से वंचित हैं, जिसका मुख्य कारण स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की लापरवाही और जानकारी का अभाव बताया जा रहा है।

​योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को कुल 5,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन किस्तों (1,000 + 2,000 + 2,000) में सीधे बैंक खाते में दी जाती है। इस राशि का उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान फल, दूध और दवाइयों जैसी पौष्टिक आवश्यकताओं को पूरा करना है। लेकिन रंगोरा की महिलाओं का आरोप है कि उन्हें आज तक एक भी किस्त प्राप्त नहीं हुई है।

​ग्रामीणों और हितग्राहियों के अनुसार, गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता न तो महिलाओं को योजना की सही जानकारी दे रही हैं और न ही फॉर्म भरवाने में कोई सहयोग कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ​कार्यकर्ता को योजना के बारे में स्वयं पर्याप्त जानकारी नहीं है।​महिलाओं को फॉर्म भरने के बजाय दूसरे कार्यालयों या स्थानों पर भटकने के लिए भेज दिया जाता है।
​समय पर फॉर्म जमा न होने के कारण पात्र महिलाएं लाभ से वंचित रह जाती हैं।

​ग्रामीण परिवेश में परिवारों की आय सीमित होने के कारण गर्भावस्था के दौरान दवाइयों और पोषण का खर्च उठाना काफी कठिन होता है। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी मदद न मिलने से आने वाले बच्चे के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
“जब हम आंगनबाड़ी केंद्र जाते हैं, तो हमें सही जानकारी नहीं दी जाती। हमें यहां-वहां भटकाया जाता है, जिससे हमें लगता है कि यह योजना केवल कागजों पर है।” — ग्रामीण हितग्राही

​यह मामला विकासखंड कसडोल की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित नहीं किया गया और लापरवाही पर लगाम नहीं कसी गई, तो केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ जरूरतमंदों तक कभी नहीं पहुँच पाएगा। ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के उच्च अधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप और दोषी कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की मांग की है।

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