यातायात जागरूकता पर शोध कर राष्ट्रपति पदक प्राप्त ट्रैफिक मैन डॉ. महेश मिश्रा को मिली पीएचडी की उपाधि

SARJU PRASAD SAHU

July 7, 2026

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में यातायात नियमों के प्रति जन-जागरूकता पर किए गए महत्वपूर्ण एवं समाजोपयोगी शोध कार्य के आधार पर राष्ट्रपति पदक से सम्मानित एवं “ट्रैफिक मैन” के नाम से प्रसिद्ध हवलदार डॉ. महेश मिश्रा को संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, अंबिकापुर द्वारा डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई है।

उल्लेखनीय है कि डॉ. महेश मिश्रा अकादमिक क्षेत्र में भी उत्कृष्ट उपलब्धियाँ हासिल कर चुके हैं। उन्होंने एम.ए. संस्कृत, राजनीति विज्ञान एवं समाजशास्त्र विषयों में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक अर्जित किया था।

डॉ. मिश्रा ने यातायात नियमों के परिपालन संबंधी जागरूकता का अध्ययन छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले के विशेष संदर्भ में विषय पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया। यह शोध सड़क सुरक्षा, यातायात अनुशासन एवं जन-जागरूकता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शोध में कोरिया जिले के नागरिकों एवं सड़क उपयोगकर्ताओं के बीच यातायात नियमों के प्रति जागरूकता, नियमों के पालन की स्थिति, सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों तथा सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के उपायों का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विस्तृत अध्ययन किया गया है।

डॉ. मिश्रा ने वर्ष 2019 में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित प्री-पीएचडी प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्ष 2021-22 में उन्होंने कोर्स वर्क सफलतापूर्वक पूर्ण किया तथा वर्ष 2023 में शोध विषय का पंजीयन कराया। दीर्घकालीन अध्ययन, क्षेत्रीय सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक शोध पद्धति के माध्यम से शोध कार्य पूर्ण करते हुए जून 2026 में उन्होंने अंतिम मौखिक परीक्षा (फाइनल वाइवा) सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की।

शोध कार्य का निर्देशन डॉ. रवीन्द्र नाथ शर्मा (पीएचडी), विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर तथा संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र अध्ययन बोर्ड के अध्यक्ष ने किया। वहीं, शोध के बाह्य परीक्षक के रूप में मध्य भारत सोशियोलॉजी संगठन के अध्यक्ष एवं प्रख्यात समाजशास्त्री प्रो. महेश शुक्ला ने शोध का मूल्यांकन एवं अंतिम मौखिक परीक्षा संपन्न कराई। उन्होंने शोध को समाजोपयोगी बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में यातायात नियमों की जानकारी प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक है तथा यह शोध समाज और मानव जीवन की सुरक्षा के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।

शोध के दौरान डॉ. मिश्रा का शोध केंद्र शासकीय राजमोहिनी देवी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर रहा, जहाँ उन्हें ग्रंथालय एवं समाजशास्त्र विभाग का भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ।

डॉ. महेश मिश्रा ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार, गुरुजनों तथा शोध यात्रा में सहयोग देने वाले सभी अधिकारियों, शिक्षकों, सहकर्मियों, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, मीडिया प्रतिनिधियों, नगर सेना, सड़क उपयोगकर्ताओं एवं शोध के उत्तरदाताओं को दिया। उन्होंने विशेष रूप से डीआईजी राजेश पाण्डेय, तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी, वर्तमान कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव, पुलिस अधीक्षक रवि कुमार कुर्रे, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी, शोध समन्वयक डॉ. पीयूष पांडेय, शोध केंद्र के प्राचार्य डॉ. एजेन टोप्पो, शोध समिति प्रमुख डॉ. विश्वासी एक्का, जिला सेनानी संजय गुप्ता, यातायात प्रभारी बीरबल राजवाड़े तथा शोध के टंकण कार्य में सहयोग देने वाले मो. आरिफ ढेवर सहित सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

गौरतलब है कि डॉ. महेश मिश्रा पिछले दो दशकों से यातायात जन-जागरूकता अभियान एवं समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने स्वयं के व्यय पर 500 से अधिक यातायात जागरूकता शिविर आयोजित कर पाँच लाख से अधिक लोगों को यातायात नियमों, संकेतों एवं सड़क सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रदान की है। उनके इस व्यापक जन-जागरूकता अभियान को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी स्थान प्राप्त हो चुका है।

डॉ. महेश मिश्रा की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर उनके सहकर्मियों, मित्रों, शुभचिंतकों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी हैं। उनका यह शोध समाजशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान होने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी मील का पत्थर सिद्ध होगा।

संपादक { विज्ञापन‍ }

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