रावणसिंघी की बेटी विद्यारानी साहू ने रचा इतिहास, 12वीं बोर्ड में 96.40 % अंक के साथ प्रदेश की टॉप-10 लिस्ट में बनाई जगह,

BHUPENDRA SINHA

April 30, 2026

गरियाबंद :- छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित 12वीं बोर्ड के परीक्षा परिणामों में ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं ने एक बार फिर अपना लोहा मनवाया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सड़क परसुली की मेधावी छात्रा विद्यारानी साहू ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से पूरे प्रदेश की प्रावीण्य सूची (Merit List) में दसवां स्थान हासिल कर क्षेत्र सहित पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

96.40% अंकों के साथ हासिल किया मुकाम

विद्यारानी साहू ने 12वीं की परीक्षा में 96.40% अंक प्राप्त किए हैं। उनकी इस उपलब्धि से न केवल विद्यालय, बल्कि पूरे गांव रावणसिंघी सहित पूरे जिले में उत्सव का माहौल है। विद्यारानी एक साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं, उनके पिता स्व .सुरेश कुमार साहू माता ज्योति साहू ने बेटी की इस कामयाबी पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे उसकी वर्षों की तपस्या का फल बताया है।

डॉक्टर बनकर सेवा करने का है लक्ष्य

अपनी सफलता पर चर्चा करते हुए विद्यारानी ने भविष्य के इरादे साफ कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि उनका अगला लक्ष्य डॉक्टर बनना है, ताकि वे चिकित्सा के क्षेत्र में जाकर समाज और जरूरतमंदों की सेवा कर सकें। अपनी सफलता का मंत्र साझा करते हुए उन्होंने कहा: “इस परिणाम का संपूर्ण श्रेय मैं अपने माता-पिता, परिवार के सहयोग और शिक्षकों के सही मार्गदर्शन को देना चाहती हूँ। उन्हीं के प्रोत्साहन ने मुझे आज इस मुकाम तक पहुँचाया है।”

स्कूल और गांव में खुशी की लहर

शासकीय विद्यालय से पढ़ाई कर टॉप-10 में जगह बनाना अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गया है। स्कूल के प्राचार्य और शिक्षकों ने विद्यारानी को मिठाई खिलाकर बधाई दी। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क परसुली की बेटी ( दीपांशी और विद्यारानी ) एक साथ बोर्ड परीक्षाओं में परचम लहराकर गांव को गौरवान्वित किया है।

सफलता के मुख्य बिंदु:

नाम: विद्यारानी साहू

माता/पिता: ज्योति साहू / स्व: सुरेश कुमार साहू

स्कूल: शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सड़क परसुली

उपलब्धि: छत्तीसगढ़ राज्य में 10वां स्थान (96.40%)

लक्ष्य: चिकित्सा क्षेत्र (डॉक्टर) में करियर बनाना

विद्यारानी की यह सफलता यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य निर्धारित हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती।

सह संपादक

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