अकती पर पी.पी. अंचल की संवेदनशील अभिव्यक्ति, लोक परंपरा से जुड़ा जीवन संदेश

SARJU PRASAD SAHU

April 20, 2026

कोरबा। जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उतरदा के हिन्दी व्याख्याता श्री पी.पी. अंचल ने अकती (अक्षय तृतीया) के पावन अवसर पर अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से विद्यार्थियों और समाज को सकारात्मकता व संस्कृति से जुड़ा प्रेरक संदेश दिया है।

उन्होंने अपनी कविता के जरिए लोकजीवन की सादगी, परंपराओं की गरिमा और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बेहद सहज शब्दों में प्रस्तुत किया। उनकी पंक्तियां न केवल भावनात्मक हैं, बल्कि समाज को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की सीख भी देती हैं—

 ➡️ अकती आज तिहार के, बहुत मुबारकबाद।

➡️ जीवन में खुशियाँ मिले, रहिए जिंदाबाद।।

➡️ करसी के पानी घलो, आजे ले सुरुआत।

➡️ ठंडा पानी पी सको, मिलथे जी सौगात।।“

कविता में ग्रामीण जीवन की झलक, प्राकृतिक संसाधनों के महत्व और परंपराओं के वैज्ञानिक पहलुओं का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। श्री अंचल ने अपने संदेश में लोगों से अपील की है कि वे लोक संस्कृति को सहेजते हुए जीवन में संतुलन और सकारात्मक सोच बनाए रखें।

अकती जैसे पावन पर्व पर उनकी यह रचना विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनने के साथ-साथ समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और सामूहिक सुख-समृद्धि का संदेश भी दे रही है।

संपादक { विज्ञापन‍ }

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