कुसमुंडा नीलकंठ कंपनी में फिर दूसरा बड़ा हादसा, भारी डंपर गहरे गड्ढे में गिरा

SARJU PRASAD SAHU

April 8, 2026

कोरबा। South Eastern Coalfields Limited (एसईसीएल) की कुसमुंडा कोयला खदान में हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 24 घंटे के भीतर नीलकंठ कंपनी में दूसरा बड़ा हादसा सामने आया है, जहां बुधवार (08 अप्रैल 2026) को एक और भारी भरकम डंपर गहरे गड्ढे में जा गिरा।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार को डंप स्लाइड होने से दो डंपर खाई में गिर गए थे, और अब बुधवार को फिर से एक डंपर हादसे का शिकार हो गया। हालांकि राहत की बात यह है कि दोनों घटनाओं में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है और वाहन चालक सुरक्षित बताया जा रहा है।

लगातार हादसों से उठे सुरक्षा पर सवाल

कुसमुंडा खदान में हो रहे लगातार हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। ठेका कंपनी नीलकंठ में कार्यरत मजदूरों और वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि सुरक्षा मानकों का पालन केवल कागजों तक सीमित है।

धूल-प्रदूषण और खराब सड़कें बनी बड़ी वजह

खदान क्षेत्र में सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं होने से भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान अत्यधिक धूल उड़ती है। शाम होते-होते हालात और भी खराब हो जाते हैं, जिससे विजिबिलिटी कम हो जाती है और दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

प्रशासन और प्रबंधन पर उठे सवाल

लगातार हो रहे हादसों के बावजूद जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में आक्रोश है। स्थानीय लोगों और मजदूरों का आरोप है कि उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है, जबकि सुरक्षा व्यवस्थाएं बेहद कमजोर हैं।

स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर असर

खदान क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर इतना अधिक है कि आसपास के इलाकों में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। मजदूरों और स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

फिलहाल सवाल यही है कि आखिर कब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे और कब जिम्मेदार एजेंसियां सुरक्षा को प्राथमिकता देंगी?

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