कसडोल नगर क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण अंचलों में भी इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व विशेष उत्साह, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठा।
राम सागर तालाब स्थित शिव मंदिर रहा आकर्षण का केंद्र
नगर के राम सागर तालाब स्थित शिव मंदिर को इस अवसर पर विशेष रूप से आकर्षक सजावट से सजाया गया था। मंदिर परिसर में फूल-मालाओं, विद्युत झालरों और रंगीन रोशनी से भव्य सजावट की गई। दिनभर श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक कर भगवान शिव की आराधना की। कई श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर रात्रि जागरण में भाग लिया।
गांव-गांव में दिखी भक्ति की झलक
केवल नगर ही नहीं, बल्कि कसडोल विकासखंड के विभिन्न गांवों में भी महाशिवरात्रि को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। ग्रामीण मंदिरों में सामूहिक पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और महाआरती का आयोजन किया गया। कई गांवों में युवाओं और महिला मंडलों द्वारा रात्रि जागरण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां देर रात तक शिव भजनों की मधुर स्वर लहरियां गूंजती रहीं।
क्यों विशेष रही इस वर्ष की महाशिवरात्रि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष महाशिवरात्रि पर शुभ योग का संयोग बना, जिससे इस दिन किए गए जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का महत्व और बढ़ गया। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था, इसलिए यह पर्व दांपत्य सुख, संतान प्राप्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
पंडालों में प्रसाद वितरण और भंडारे
नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह भव्य पंडाल सजाकर प्रसाद वितरण किया गया। कई स्थानों पर विशाल भंडारों का आयोजन हुआ, जहां सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सामाजिक संगठनों और युवा समितियों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। महिलाओं एवं बच्चों की विशेष उपस्थिति ने आयोजन को और भी उत्सवमय बना दिया।
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर कसडोल क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय रहा। नगर से लेकर गांव तक हर स्थान पर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला और श्रद्धालुओं ने पूरे हर्ष और उल्लास के साथ भगवान भोलेनाथ की आराधना कर पुण्य लाभ अर्जित किया।