मनरेगा पर संकट: ‘जी राम जी विधेयक’ के बहाने महात्मा गांधी के विचारों पर हमला मोदी सरकार का नया कानून ग्रामीण रोजगार गारंटी को कमजोर करने की साजिश

TEKRAM KOSLE

December 19, 2025

रिपोर्टर टेकराम कोसले

Masb news

प्रकाशनार्थ

महात्मा गांधी – जै राम जी!
(आलेख: संजय पराते)

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त कर उसकी जगह विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक 2025, जिसे आमतौर पर ‘वीबी-जी राम जी विधेयक’ कहा जा रहा है, को लागू करने का फैसला देश की राजनीति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक बड़ा विवाद खड़ा कर रहा है।

यह फैसला केवल एक योजना में बदलाव नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के विचारों, ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों और संविधान में निहित सामाजिक न्याय की अवधारणा पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

मनरेगा के नाम से भी नफरत क्यों?

संघ-भाजपा पर आरोप लगते रहे हैं कि उन्हें महात्मा गांधी न केवल उनके विचारों, बल्कि उनके नाम से भी असहज करते हैं। मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना, जो गांधी के नाम से जुड़ी है, को समाप्त कर राम के नाम पर नई योजना लाना, इसी वैचारिक राजनीति की ओर इशारा करता है।

पहले योजना का नाम ‘पूज्य बापू’ रखने की चर्चा हुई, लेकिन बाद में उसे बदलकर ‘राम’ से जोड़ दिया गया। इससे साफ होता है कि सरकार का उद्देश्य धार्मिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक लाभ साधना है, न कि वास्तविक ग्रामीण विकास।

ग्रामीण मजदूरों पर सीधा हमला

मोदी सरकार पहले ही चार श्रम संहिताओं के जरिए शहरी मजदूरों के अधिकार कमजोर कर चुकी है। अब यह नया विधेयक ग्रामीण मजदूरों के रोजगार अधिकारों पर सीधा हमला है।

मनरेगा की मूल अवधारणा थी—

सार्वभौमिक रोजगार की गारंटी

मांग आधारित काम

केंद्र की 100% वित्तीय जिम्मेदारी

नया विधेयक इन तीनों स्तंभों को कमजोर करता है।

100 दिन से 125 दिन: दिखावा या धोखा?

सरकार दावा कर रही है कि नए कानून में रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिए गए हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि—

रोजगार सभी के लिए नहीं, बल्कि केंद्र द्वारा चुने गए क्षेत्रों तक सीमित होगा

चयन के मापदंड स्पष्ट नहीं हैं

यह चयन राजनीतिक हितों के आधार पर हो सकता है

पिछले 11 वर्षों में सरकार औसतन केवल 40–45 दिन का रोजगार ही दे पाई है। ऐसे में 125 दिन का दावा महज कागजी और भ्रामक प्रतीत होता है।

जॉब कार्ड, आधार और डिजिटल हाजिरी का जाल

मनरेगा को कमजोर करने के लिए पिछले वर्षों में कई कदम उठाए गए—

अपर्याप्त बजट

मजदूरी भुगतान में देरी

आधार और बैंक खाते की अनिवार्यता

डिजिटल हाजिरी

अक्टूबर–नवंबर 2025 में ही 27 लाख मजदूरों के नाम ‘निष्क्रिय’ बताकर हटाए गए। नया विधेयक इसी प्रक्रिया को और तेज करेगा।

कृषि मौसम में रोजगार निलंबन: मजदूरों के लिए खतरा

नए कानून में सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि कृषि-सघन मौसम में रोजगार योजना को निलंबित किया जा सके।
लेकिन—

‘कृषि-सघन मौसम’ की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं

कई क्षेत्रों में सालभर खेती होती है

इस प्रावधान का मतलब है कि जरूरत के समय मजदूरों को काम से वंचित करना, जिससे वे फिर से भूस्वामियों पर निर्भर हो जाएंगे।

महिलाओं और गरीबों पर सबसे बड़ा असर

ग्रामीण भारत में—

महिलाओं को आज भी 30–40% कम मजदूरी मिलती है

मशीनीकरण से रोजगार के दिन घटे हैं

मनरेगा ने इन हालात में न्यूनतम सहारा और सम्मान दिया।
नया विधेयक इस सहारे को छीनकर महिला मजदूरों और गरीब परिवारों को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाएगा।

फंडिंग में बदलाव: राज्यों पर आर्थिक बोझ

नए विधेयक में—

मजदूरी भुगतान में केंद्र की जिम्मेदारी 100% से घटाकर 60%

40% बोझ राज्यों पर

बेरोजगारी भत्ता और मुआवजा भी राज्यों पर

जबकि राज्य पहले से ही वित्तीय संकट में हैं। इससे वे रोजगार कार्यों से बचने लगेंगे और योजना कागजों तक सीमित हो जाएगी।

कम मजदूरी: मेहनत का अपमान

जहाँ—

किसान संगठन 750 रुपए प्रतिदिन मजदूरी की मांग कर रहे हैं

संसदीय समिति ने 400 रुपए की सिफारिश की

वहीं सरकार ने 240 रुपए प्रतिदिन तय किए हैं, जो कई राज्यों की न्यूनतम मजदूरी से भी कम है।

संविधान और गांधी के विचारों के खिलाफ

मनरेगा ने—

गरीबों की आय में 10% तक वृद्धि

सामूहिक सौदेबाजी की ताकत

आत्मसम्मान की भावना

को बढ़ाया।
नया विधेयक इस पूरी संरचना को ध्वस्त कर देता है और संविधान के अनुच्छेद 21 और 23 की भावना के खिलाफ जाता है।

निष्कर्ष: ‘जै राम जी’ नहीं, ‘जॉब राम जी’ की जरूरत

यदि सरकार सच में मनरेगा का आधुनिकीकरण चाहती, तो—

सामाजिक संगठनों से संवाद करती

कानून में सुधार करती

बजट बढ़ाती

लेकिन वास्तविक उद्देश्य सार्वभौमिक रोजगार गारंटी को खत्म करना और कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देना है।
महात्मा गांधी ने अंतिम व्यक्ति की चिंता की थी, लेकिन यह विधेयक उसी व्यक्ति के अधिकारों को ‘जै राम जी’ कहकर विदा कर रहा है।

(लेखक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं।
संपर्क: 94242-31650)

सह संपादक

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