RTI — जनता का अधिकार, जवाबदेही की नई पहचान
📜 RTI की शुरुआत कैसे हुई?
भारत में सूचना का अधिकार (Right to Information – RTI) की शुरुआत जनता के अधिकार और पारदर्शिता की मांग से हुई थी।
लोगों को शासन के कामकाज में झांकने का अधिकार देने की इस पहल की नींव राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के देवडूंगरी गांव में “मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS)” ने 1990 के दशक में रखी थी।
लगातार जन आंदोलनों के बाद 15 जून 2005 को भारतीय संसद ने “सूचना का अधिकार अधिनियम” पारित किया और 12 अक्टूबर 2005 से यह पूरे देश में लागू हुआ।
📖 RTI क्या है?
सूचना का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है, जो हर नागरिक को सरकारी विभागों से सूचना प्राप्त करने का अधिकार देता है।
इसका उद्देश्य शासन में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित करना है।
RTI अधिनियम 2005 के तहत,
कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी विभाग, संस्था, पंचायत, निगम या कार्यालय से जानकारी मांग सकता है —
और संबंधित विभाग को 30 दिनों के भीतर उत्तर देना अनिवार्य होता है।
🧾 RTI आवेदन कैसे करें?
RTI आवेदन करने की प्रक्रिया बेहद सरल है —
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आवेदन पत्र तैयार करें
किसी सादे कागज पर या निर्धारित फॉर्म में आप अपनी सूचना स्पष्ट शब्दों में लिखें।
आवेदन की शुरुआत इस तरह कर सकते हैं —
“सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत निम्न जानकारी उपलब्ध कराने की कृपा करें।” -
शुल्क जमा करें
₹10 का शुल्क निर्धारित है, जो डाक टिकट, IPO (Indian Postal Order) या नकद के रूप में जमा किया जा सकता है। -
संबंधित विभाग को भेजें
आवेदन उस विभाग के लोक सूचना अधिकारी (PIO) को भेजना होता है, जिसके पास सूचना उपलब्ध है। -
उत्तर की प्रतीक्षा करें
विभाग को 30 दिनों के भीतर उत्तर देना अनिवार्य है।
अगर उत्तर संतोषजनक न हो, तो पहली अपील (First Appeal) और उसके बाद दूसरी अपील (Second Appeal) की जा सकती है।
🏛️ RTI के तहत कौन जिम्मेदार होता है?
हर सरकारी विभाग में एक अधिकारी को “लोक सूचना अधिकारी (Public Information Officer – PIO)” नियुक्त किया जाता है।
यही अधिकारी नागरिकों के आवेदन प्राप्त करता है और निर्धारित समय में जवाब देने का दायित्व निभाता है।
इसके अतिरिक्त, राज्य और केंद्र स्तर पर “मुख्य सूचना आयुक्त” (Chief Information Commissioner) होते हैं जो अपीलों का निपटारा करते हैं।
🏢 RTI का उपयोग कहां-कहां किया जा सकता है?
आप RTI का उपयोग केंद्र और राज्य सरकारों के लगभग हर विभाग में कर सकते हैं, जैसे —
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पंचायत, नगर निगम, नगर पालिका
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शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग
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पुलिस विभाग
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बिजली, जल, सड़क निर्माण विभाग
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बैंक, बीमा, सरकारी उपक्रम
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रेलवे, पोस्ट ऑफिस आदि
📂 कौन-कौन सी सूचनाएं प्राप्त की जा सकती हैं?
RTI के अंतर्गत नागरिक निम्न प्रकार की सूचनाएं मांग सकते हैं —
✅ सरकारी योजनाओं और खर्चों की जानकारी
✅ भर्ती, पदोन्नति या नियुक्ति की प्रक्रिया
✅ विकास कार्यों में धन की उपयोगिता रिपोर्ट
✅ टेंडर, अनुबंध, ठेके और बिल भुगतान की जानकारी
✅ सरकारी विभागों में फाइल की स्थिति या आदेश की प्रति
✅ किसी निर्णय या नीति से संबंधित अभिलेख
(राष्ट्रीय सुरक्षा, व्यक्तिगत गोपनीयता या संवेदनशील जांच से संबंधित जानकारी RTI से बाहर रहती है।)
👥 RTI का उपयोग कौन कर सकता है?
भारत का हर नागरिक (Indian Citizen) RTI के तहत जानकारी मांग सकता है।
इसमें किसी विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं है।
जो भी व्यक्ति यह जानना चाहता है कि “सरकार क्या कर रही है और क्यों कर रही है”, वह RTI दायर कर सकता है।
⚖️ भारतीय संविधान में RTI का स्थान
सूचना का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) —
“अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार”
से जुड़ा हुआ है।
अर्थात् जब तक नागरिक को जानकारी नहीं मिलेगी, तब तक वह अपनी राय या आलोचना स्वतंत्र रूप से नहीं दे सकता।
इसलिए RTI को भारतीय लोकतंत्र की “रीढ़ की हड्डी” कहा गया है।
🪔 RTI का महत्व
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शासन में पारदर्शिता बढ़ाता है
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भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाता है
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नागरिकों को सशक्त बनाता है
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सरकारी जवाबदेही तय करता है
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लोकतंत्र को मजबूत बनाता है