वन अपराध अभियोजन पर दो दिवसीय कार्यशाला, अधिकारियों ने सीखी कानूनी प्रक्रिया की बारीकियां

SARJU PRASAD SAHU

October 15, 2025

बलौदाबाजार -: 15 अक्टूबर 2025  बलौदाबाजार वनमंडल कार्यालय में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 एवं वन अपराध प्रकरण अभियोजन से जुड़े दस्तावेजों की तैयारी के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन वनमंडलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने किया। वनमंडलाधिकारी ने कहा कि वन अपराध प्रकरणों की जांच और अभियोजन प्रक्रिया को विधिक दृष्टि से मजबूत बनाना वन सुरक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा है। प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को इसकी गहन जानकारी आवश्यक है।प्रशिक्षण के पहले दिन कृषानू चन्द्राकार ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के उद्भव, उद्देश्य और प्रमुख बिंदुओं पर आधारित सत्र में अधिनियम के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और इसकी आवश्यकता पर विस्तृत जानकारी दी।

दूसरे सत्र में आर. पी. साहू सेवानिवृत्त उपवनमंडलाधिकारी, वन ने “वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की महत्वपूर्ण धाराएँ” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से विभिन्न धाराओं को समझाते हुए बताया कि ये जानकारी फील्ड में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।तीसरे सत्र में किशोर वासनिक एसडीओपी कसडोल ने “वन्यजीव अपराध के प्रकरण निर्माण में होने वाली सामान्य गलतियां” विषय पर जानकारी दी। उन्होंने जांच के दौरान साक्ष्य संकलन और कानूनी प्रपत्रों की शुद्धता पर विशेष बल दिया। अंतिम सत्र में यशवंत साहू एडवोकेट, हाईकोर्ट बिलासपुर ने भारतीय न्याय संहिता और भारतीय न्याय प्रक्रिया संहिता की महत्वपूर्ण धाराओं पर जानकारी दी।कार्यक्रम में वनमंडल के सभी परिक्षेत्रों से अधिकारी उपस्थित रहे और विभिन्न सत्रों में सक्रिय भागीदारी के साथ प्रश्नोत्तर के माध्यम से अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं।

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