वनांचल में शिक्षा की नई कहानी: सरकारी शिक्षक ने अपने वेतन से बदला स्कूल का रूप, बने मिसाल,

MOTI LAL

December 4, 2025

छुरा/ गरियाबंद:- जिले के छुरा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले छोटे से वनांचल ग्राम कोसमी में सरकारी शिक्षा सुधार का एक अनोखा और प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। गांव के प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षक हेमलाल ध्रुव ने जिस समर्पण और जिम्मेदारी का परिचय दिया है, वह न सिर्फ जिले बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
ढाई लाख रुपये खर्च कर बदला स्कूल का स्वरूप,

जहां अधिकतर सरकारी विद्यालय संसाधनों की कमी से जूझते रहते हैं, वहीं शिक्षक हेमलाल ध्रुव ने सरकारी व्यवस्था पर निर्भर रहने के बजाय अपने निजी वेतन से ही स्कूल को स्मार्ट एवं आदर्श विद्यालय में बदलने का बीड़ा उठाया।
उन्होंने विद्यालय की छत की ढलाई, पुताई-पेंट, कक्षाओं की मरम्मत, फर्श सुधार, आवश्यक शैक्षणिक सामग्री की व्यवस्था, कक्षाओं की आकर्षक सज्जा और बच्चों के लिए अनुकूल शिक्षण वातावरण तैयार करने जैसे कार्यों पर लगभग ढाई लाख रुपये अपनी जेब से खर्च किए।

बढ़ा बच्चों का स्कूल के प्रति लगाव,

शिक्षक की इस निःस्वार्थ पहल ने न केवल भवन की सूरत बदली है, बल्कि बच्चों के मन में स्कूल के प्रति एक नया उत्साह और लगाव भी पैदा किया है।
अब कक्षाएं रंगीन, साफ-सुथरी और आकर्षक दिखती हैं। दीवारों पर शैक्षणिक चित्र, चार्ट, प्रेरणादायक संदेश और सीखने-सिखाने के उपकरण बच्चों की जिज्ञासा को बढ़ाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले जहां बच्चे स्कूल आने में उत्साह नहीं दिखाते थे, वहीं अब वे समय पर पहुंचने लगे हैं और पढ़ाई में उनकी रुचि भी बढ़ी है।

ग्रामीणों ने की शिक्षक की खुलकर सराहना,

ग्राम कोसमी के ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षक हेमलाल ध्रुव की पहल को दिल से सराहा है। उनका कहना है कि ऐसे समर्पित शिक्षक ही सरकारी शिक्षा को नई दिशा दे सकते हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि शासन-प्रशासन को भी ऐसे सेवा भावी शिक्षकों को सम्मानित करना चाहिए, जो बिना किसी अपेक्षा के अपने कर्तव्य से आगे बढ़कर बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में लगे हैं।

स्कूल प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों ने बताया अनुकरणीय उदाहरण,

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विद्यालय प्रबंधन ने भी शिक्षक ध्रुव की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए अनुकरणीय मिसाल बताया।
उन्होंने कहा कि यदि हर सरकारी स्कूल में ऐसे समर्पित शिक्षक हों तो संसाधनों की कमी के बावजूद भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना मुश्किल नहीं रहेगा।

वनांचल में शिक्षा की रोशनी,

ग्राम कोसमी जैसे वनांचल क्षेत्र में, जहां अक्सर मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं होतीं, वहां एक शिक्षक द्वारा अपने सीमित संसाधनों से इतना बड़ा परिवर्तन करना अपने आप में साबित करता है कि यदि नीयत और प्रयास सच्चे हों, तो सरकारी स्कूलों को उत्कृष्ट बनाने से कोई नहीं रोक सकता।

समाज और शिक्षा जगत के लिए प्रेरणा,

हेमलाल ध्रुव का यह योगदान केवल एक स्कूल नहीं, बल्कि पूरे समाज और शिक्षा क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक है।
उनका समर्पण, त्याग और दूरदृष्टि यह दिखाती है कि सरकारी शिक्षा तंत्र में बदलाव केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि जिम्मेदार शिक्षकों के जज्बे से भी संभव है।

प्रधान संपादक

Share this content:

Leave a Comment