राष्ट्रीय प्रेस दिवस: लोकतंत्र के प्रहरी—भारतीय प्रेस की भूमिका, चुनौतियाँ और बदलता स्वरूप

TEJASWI NATH SONI

November 16, 2025

हर वर्ष 16 नवंबर को देश भर में राष्ट्रीय प्रेस दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय प्रेस की स्वतंत्रता, उसकी नैतिकता और लोकतंत्र में निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने का अवसर है। यह वही दिन है जब 1956 में प्रेस परिषद् ऑफ इंडिया (PCI) को एक स्वायत्त, स्वतंत्र संस्था के रूप में स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य था—
प्रेस की स्वतंत्रता को संरक्षित रखना और उसकी जिम्मेदारियों का मार्गदर्शन करना।

आज का दिवस मात्र औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि पत्रकारिता के उन मूल्यों को स्मरण करने का दिन है जो समाज में सत्य, निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं।


प्रेस—लोकतंत्र का चौथा स्तंभ

भारत में प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। संसद, न्यायपालिका और कार्यपालिका की तरह ही प्रेस भी सामाजिक संतुलन और जनता की आवाज़ को शक्ति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रेस ही वह माध्यम है जो—

  • सरकार को उसकी नीतियों पर जवाबदेह बनाता है,

  • जनता की समस्याएँ आवाज़ देता है,

  • समाज में जागरूकता और शिक्षा का प्रसार करता है,

  • भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करता है,

  • और लोकतांत्रिक संवाद को जीवित रखता है।


1956 से आज तक—प्रेस का सफ़र

प्रेस परिषद की स्थापना पत्रकारिता में मानकों को बनाए रखने के लिए हुई थी।
वर्षों के दौरान भारतीय प्रेस ने—

  • आपातकाल जैसी चुनौतियाँ झेली,

  • डिजिटल और सोशल मीडिया का युग देखा,

  • फेक न्यूज के खतरे का सामना किया,

  • और समय के साथ खुद को लगातार परिवर्तित किया।

आज भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहाँ प्रेस की स्वतंत्रता को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) द्वारा संरक्षण प्राप्त है।


नए युग की पत्रकारिता — डिजिटल, तेज़ और पारदर्शी

21वीं सदी की पत्रकारिता पहले से अधिक तेज़, तकनीकी और व्यापक हो चुकी है।

  • डिजिटल मीडिया

  • ऑनलाइन पोर्टल

  • सोशल नेटवर्क

  • मोबाइल पत्रकारिता
    इन सबने सूचना प्रसार की गति को कई गुना बढ़ा दिया है।

अब रिपोर्टर सिर्फ कैमरा लेकर नहीं चलता, बल्कि स्मार्टफोन ही उसकी संपूर्ण रिपोर्टिंग टीम का काम करता है।
डेटा पत्रकारिता, फैक्ट चेकिंग और इन्वेस्टिगेशन आज के मीडिया का नया चेहरा है।


पत्रकार—जो हर परिस्थिति में मोर्चे पर खड़े रहते हैं

राष्ट्रीय प्रेस दिवस उन पत्रकारों को श्रद्धांजलि देने का भी दिन है जो—

  • प्राकृतिक आपदाओं

  • महामारी

  • युद्ध जैसे हालात

  • अपराध की रिपोर्टिंग

  • राजनीतिक अस्थिरता

  • ग्रामीण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों
    में जोखिम उठाकर जनता तक सत्य पहुँचाते हैं।

पत्रकारिता किसी नौकरी का नाम नहीं, यह कर्तव्य, साहस और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता का नाम है।


चुनौतियाँ—जिनसे प्रेस रोज़ जूझता है

आधुनिक समय में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के सामने कई चुनौतियाँ उभरकर सामने आई हैं—

  • फेक न्यूज का बढ़ता खतरा

  • टीआरपी की होड़

  • डेटा चोरी और साइबर हमले

  • पत्रकारों की सुरक्षा

  • मीडिया ट्रायल की समस्या

  • निष्पक्षता बनाए रखना

  • सोशल मीडिया के दबाव

  • ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी

इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय पत्रकारिता लगातार मजबूत होती जा रही है।


प्रेस दिवस 2025—देश भर में जागरूकता कार्यक्रम

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर देश भर में—

  • संगोष्ठियाँ

  • संवाद कार्यक्रम

  • पत्रकार सम्मान समारोह

  • फोटो व दस्तावेज़ प्रदर्शनी

  • मीडिया नैतिकता पर विचार-विमर्श
    जैसे आयोजन किए जा रहे हैं।

प्रेस परिषद ने भी इस दिवस पर मीडिया स्वायत्तता, ज़िम्मेदार रिपोर्टिंग और फेक न्यूज के विरुद्ध संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया।


प्रेस की शक्ति—जनता की आवाज़ से सरकार तक

प्रेस वह ताकत है जो—

  • समाज की धड़कन को पहचानता है,

  • जनता की समस्याओं को शासन तक पहुँचाता है,

  • और राष्ट्र की नीतियों को प्रभावित करता है।

राष्ट्रीय प्रेस दिवस यह याद दिलाता है कि स्वतंत्र प्रेस ही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है

District Bureau Chief BALODA BAZAR

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