रायपुर सहकारी बैंक कर्मियों में उबाल — पाँच वर्षों से वेतनवृद्धि पर रोक, देवेंद्र पाण्डेय और कर्मचारी संघ अध्यक्ष मोहनलाल साहू के नेतृत्व में आंदोलन की चेतावनी

TOSHAN PRASAD CHOUBEY

October 11, 2025


पलारी/बलौदा बाजार 11 अक्टूबर।
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, रायपुर के कर्मचारियों में पाँच वर्षों से रोकी गई वार्षिक वेतनवृद्धि को लेकर गहरा असंतोष और आक्रोश है। सहकारिता पंजीयक, छत्तीसगढ़ द्वारा वर्ष 2021 से लगातार पाँच सालों से वेतनवृद्धि नहीं दिए जाने पर बैंककर्मियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
इस मामले में बैंक के वरिष्ठ कर्मचारी देवेंद्र पाण्डेय एवं उनके साथ 20 अन्य कर्मचारियों ने माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर में रिट याचिका दायर की थी। न्यायालय ने 19 फरवरी 2025 को कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय देते हुए वेतनवृद्धि जारी करने के निर्देश दिए। इसके पश्चात माननीय मुख्य न्यायाधिपति की युगल पीठ ने 6 अगस्त 2025 को इस आदेश को यथावत रखा। इसके बावजूद सहकारिता पंजीयक कार्यालय द्वारा अब तक किसी भी कर्मचारी को लाभ नहीं दिया गया।

देवेंद्र पाण्डेय ने बताया कि न्यायालय के आदेश की 90 दिन की अवधि समाप्त हो चुकी है, पर विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई, जो न्यायालय की सीधी अवमानना है। इस मामले में कन्टेम्प्ट ऑफ कोर्ट की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है।

रायपुर जिला सहकारी बैंक प्रदेश का सबसे बड़ा सहकारी बैंक है, जिसके अंतर्गत 6 जिलों में 73 शाखाएँ, 550 समितियाँ और 711 धान खरीदी केंद्र संचालित हैं। बैंक हर वर्ष लगभग 7 लाख किसानों से 30 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदी कर 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करता है। वर्ष 2025 में बैंक ने ₹216 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित किया है, फिर भी कर्मचारियों को उनका वैधानिक हक नहीं मिल सका है।

कर्मचारी संघ अध्यक्ष मोहनलाल साहू एवं याचिकाकर्ता देवेंद्र पाण्डेय के नेतृत्व में कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि न्यायालय के आदेशों का पालन शीघ्र नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। आंदोलन की स्थिति में बैंक की सभी शाखाएँ, समितियाँ और धान खरीदी केंद्रों का कार्य प्रभावित होगा, जिससे किसानों और ग्राहकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
कर्मचारियों का कहना है कि न्यायालय के आदेशों के बावजूद वेतनवृद्धि रोकना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का भी उदाहरण है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि शासन ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो आंदोलन अपरिहार्य होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन एवं सहकारिता पंजीयक की होगी।

प्रबंध संपादक (Managing Editor)

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