भाटापारा व्यवहार न्यायालय का 20वां स्थापना दिवस: मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के नेतृत्व में न्यायिक सुधारों की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ

SARJU PRASAD SAHU

December 4, 2025

बलौदाबाजार, 4 दिसम्बर 2025अधिवक्ता संघ भाटापारा द्वारा बुधवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में न्यायालय का 20वां स्थापना दिवस समारोह मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा थे, जिनकी उपस्थिति ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से किया गया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय भी उपस्थित रहे।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में न्यायपालिका और अधिवक्ता समुदाय की साझा जिम्मेदारियों और संवेदनशील भूमिका पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल परंपरा नहीं, बल्कि “सामूहिक यात्रा, साझा मूल्यों और विधिक समुदाय की अटूट भावना का उत्सव है।”

उन्होंने बार और बेंच के सौहार्दपूर्ण संबंधों को न्याय व्यवस्था की मजबूती का आधार बताया और कहा कि जब दोनों संस्थाएँ सम्मान और सहयोग के साथ काम करती हैं, तभी न्याय प्रणाली विश्वास और पारदर्शिता को स्थापित करती है। उन्होंने भाटापारा बार एसोसिएशन की अब तक की प्रगति को सराहते हुए कहा कि संगठन ने सदैव व्यावसायिकता, मार्गदर्शन और अनुशासन को प्राथमिकता दी है।

युवा अधिवक्ताओं के लिए संदेश

मुख्य न्यायाधीश ने विशेष रूप से युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा—

“तर्क मुकदमे जिता सकते हैं, लेकिन ईमानदारी ही न्याय व्यवस्था में विश्वास स्थापित करती है। अनुशासन, विनम्रता और सीखने की निरंतर भावना इस पवित्र पेशे में सफलता दिलाती है।”उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ताओं को प्रकाशस्तंभ बताते हुए कहा कि अगली पीढ़ी इन्हीं के अनुभव से दिशा प्राप्त करती है।

भाटापारा न्यायालय की प्रगति

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि भाटापारा सिविल कोर्ट का उद्घाटन 3 दिसंबर 2005 को हुआ था। वर्तमान में बार एसोसिएशन के सदस्य 163 तक पहुँच चुके हैं। प्रारंभ में सिविल जज जूनियर डिवीजन और एडीजे कोर्ट का गठन हुआ था, जिसके बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन और अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय की स्थापना की गई।

उन्होंने यह भी बताया कि 6 नवंबर 2025 को न्यायिक आवश्यकताओं को देखते हुए छह नए न्यायालय कक्षों का शिलान्यास किया गया है।

न्यायिक अवसंरचना में रिकॉर्ड प्रगति

न्यायमूर्ति राकेश मोहन पाण्डेय ने अपने वक्तव्य में बताया कि 29 मार्च 2023 को पदभार ग्रहण करने के बाद मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने न्यायिक कार्यों की गति बढ़ाने में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उनके पदभार ग्रहण करने के समय उच्च न्यायालय में लगभग 95,000 प्रकरण लंबित थे, जो अब घटकर 78,000 रह गए हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की न्यायिक अवसंरचना ने पिछले दो दशकों की तुलना में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है —

उच्च न्यायालय में 7 नई कोर्ट बिल्डिंग,

80 आवासीय परिसर,

8 अन्य महत्वपूर्ण निर्माण सहित कुल 95 निर्माण कार्य पूरे हुए।

जिला न्यायपालिका में 26 नई कोर्ट बिल्डिंगों का निर्माण प्रारंभ हुआ है, जिनमें कई पूर्ण हो चुकी हैं और कुछ निर्माणाधीन हैं। न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए 24 स्थानों पर आवासीय परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य हो रहा है।

न्यायमूर्ति पाण्डेय ने कहा—

“पिछले ढाई वर्षों में जितना निर्माण हुआ, उतना पिछले 22 वर्षों में नहीं हुआ था। यह मुख्य न्यायाधीश की दूरदृष्टि और कुशल नेतृत्व का प्रमाण है।”

कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ अधिवक्ता जी.डी. मानिकुपरी के स्वागत भाषण से हुई और समापन अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अनिल मिश्रा के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

कार्यक्रम में रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलौदाबाजार-भाटापारा, जिले के न्यायिक अधिकारी, अधिवक्तागण, कर्मचारी और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सह संपादक

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