8 नवंबर 2025।
आज से ठीक 9 वर्ष पहले, 8 नवंबर 2016 की रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक ऐसा निर्णय घोषित किया जिसने भारत की अर्थव्यवस्था, समाज, राजनीति और आम जनता के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।
वह था — नोटबंदी (Demonetisation) का ऐतिहासिक फैसला।
प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि 500 रुपये और 1000 रुपये के सभी पुराने नोट तत्काल प्रभाव से अवैध (लीगल टेंडर नहीं) होंगे। यह निर्णय काले धन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद की फंडिंग और नकली नोटों पर रोक लगाने के उद्देश्य से लिया गया था।
🔹 नोटबंदी क्यों की गई थी?
सरकार के अनुसार नोटबंदी का उद्देश्य था —
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देश में जमा काले धन को बाहर लाना।
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आतंकवाद और नक्सलवाद को मिलने वाली फंडिंग को रोकना।
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नकली नोटों के कारोबार पर लगाम लगाना।
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कैशलेस और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना।
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टैक्स प्रणाली को पारदर्शी और संगठित बनाना।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा था —
“यह देश के ईमानदार नागरिकों के हक की रक्षा के लिए कदम है। भ्रष्टाचार, काले धन और आतंकवाद के खिलाफ यह लड़ाई जनता की शक्ति से ही सफल होगी।”
🔹 कैसे हुई थी नोटबंदी की प्रक्रिया
घोषणा के बाद 9 नवंबर से 30 दिसंबर 2016 तक लोगों को पुराने नोट बैंकों और डाकघरों में जमा करने की अनुमति दी गई थी।
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बैंक और एटीएम के बाहर लंबी कतारें लग गईं।
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कई जगहों पर नकदी की भारी किल्लत देखी गई।
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छोटे व्यापारियों, किसानों और मजदूर वर्ग को तत्कालिक आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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वहीं दूसरी ओर लोग डिजिटल पेमेंट, UPI, Paytm, PhonePe जैसे विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ने लगे।
🔹 नोटबंदी का आर्थिक असर
✅ सकारात्मक प्रभाव:
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डिजिटल भुगतान में विस्फोटक वृद्धि:
2016 में भारत में जहाँ महीनेभर में कुछ लाख डिजिटल लेनदेन होते थे, वहीं अब 2025 में मासिक 1,200 करोड़ से अधिक UPI ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। -
करदाताओं की संख्या बढ़ी:
आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में 80% से अधिक वृद्धि हुई। -
नकली नोटों पर लगाम:
RBI की रिपोर्ट के अनुसार नकली नोटों का प्रचलन 2016 के बाद घटा। -
बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता:
बैंकों में भारी मात्रा में नकदी जमा हुई, जिससे वित्तीय प्रवाह बढ़ा।
❌ नकारात्मक प्रभाव:
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छोटे व्यापार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और असंगठित क्षेत्र को भारी झटका लगा।
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लाखों मजदूर और दिहाड़ी वर्ग अस्थायी रूप से बेरोजगार हुए।
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GDP विकास दर 7.6% से घटकर 5.7% तक पहुंच गई।
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नोटबंदी के दौरान देशभर में लंबी कतारें, असुविधाएं और असंतोष की स्थिति देखी गई।
🔹 RBI की रिपोर्ट: 99% नोट लौट आए
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी के तहत बंद किए गए ₹500 और ₹1000 के लगभग 15.44 लाख करोड़ रुपये में से 15.31 लाख करोड़ (99%) बैंकिंग प्रणाली में वापस लौट आए।
आलोचकों ने इसे नोटबंदी की विफलता बताया, जबकि सरकार का कहना था कि इससे “काला धन बैंकिंग सिस्टम में लाया गया”, जो पहले छिपा हुआ था।
🔹 नोटबंदी के बाद की नीतियाँ और बदलाव
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₹2000 का नोट भी हुआ बंद (2023):
मई 2023 में RBI ने ₹2000 के नोटों को चलन से हटाने की घोषणा की। -
UPI क्रांति:
नोटबंदी के बाद डिजिटल इंडिया और UPI पेमेंट सिस्टम ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल ट्रांजैक्शन देश बना दिया। -
कैशलेस अर्थव्यवस्था:
शहरी क्षेत्रों में अब 80% से अधिक भुगतान डिजिटल माध्यमों से होते हैं। -
कर सुधार:
GST लागू होने के बाद टैक्स प्रणाली अधिक पारदर्शी हुई। -
जनता की जागरूकता:
आर्थिक पारदर्शिता, बैंकिंग और डिजिटलीकरण के प्रति नागरिकों में जागरूकता बढ़ी।
🔹 9 साल बाद क्या हुआ बदलाव?
2025 में नोटबंदी के 9 साल पूरे होने पर देश की अर्थव्यवस्था में कई स्थायी परिवर्तन दिखते हैं —
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डिजिटल पेमेंट अब सामान्य जीवन का हिस्सा बन चुका है।
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काले धन पर नियंत्रण हुआ, हालांकि पूरी तरह समाप्त नहीं।
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टेक्नोलॉजी आधारित टैक्स सिस्टम ने वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया।
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ग्रामीण क्षेत्र भी डिजिटल बैंकिंग से जुड़ रहे हैं।
🔹 जनता की राय
कुछ लोगों का मानना है कि नोटबंदी से देश में डिजिटल क्रांति और आर्थिक पारदर्शिता आई,
जबकि कई अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि यह आर्थिक झटका था जिससे छोटे व्यवसायों और गरीब वर्ग को तत्कालिक नुकसान हुआ।
फिर भी, यह सच है कि 8 नवंबर 2016 की रात ने भारत की आर्थिक सोच, लेनदेन की आदत और वित्तीय प्रणाली को हमेशा के लिए बदल दिया।