कोरबा, 04 दिसम्बर 2025/ जिले के पाली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम धतुरा के प्रतिभाशाली युवा श्रीराम कौशिक ने शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धि हासिल करते हुए BCA में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका तथा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संयुक्त रूप से स्वर्ण पदक पहनाकर सम्मानित किया।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्र से निकले श्रीराम की इस उपलब्धि को पूरे प्रदेश में गौरव के रूप में देखा जा रहा है।
—
साधारण परिवार से निकलकर राष्ट्रीय मंच पर चमका सितारा
श्रीराम कौशिक एक साधारण और मेहनतकश परिवार से आते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी लगन, अनुशासन और सतत अध्ययन के दम पर यह उपलब्धि हासिल की।
उनकी सफलता यह सिद्ध करती है कि—
“संकल्प और शिक्षा के बल पर हर असंभव को संभव बनाया जा सकता है।”
—
ग्रामीण गौरव : पहली बार किसी युवक को राष्ट्रपति–राज्यपाल–मुख्यमंत्री तीनों से सम्मान
यह पहला अवसर है जब धतुरा ग्राम का कोई युवा देश के तीनों शीर्ष पदों — राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री — से सम्मान प्राप्त कर रहा है।
इस उपलब्धि ने पूरे गांव, पाली ब्लॉक और कोरबा जिले का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया है।
—
संघर्ष से सफलता तक : दोनों भाइयों ने लिखी नई कहानी
श्रीराम के बड़े भाई रामभोला कौशिक, नोएडा की एक प्रतिष्ठित कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर के पद पर कार्यरत हैं।
दोनों भाइयों की यह उपलब्धि धतुरा गांव को शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।
—
धतुरा में हुआ भव्य स्वागत : आतिशबाजी, ढोल–ताशे और शोभायात्रा
स्वर्ण पदक प्राप्त कर गांव लौटने पर श्रीराम कौशिक का स्वागत अत्यंत भव्य रहा।
मुख्य आकर्षण—
ढोल–ताशों और आतिशबाजी के साथ भव्य शोभायात्रा
मां महामाया मंदिर में विशेष पूजा–अर्चना
ग्राम पंचायत द्वारा बड़े स्तर पर आयोजन
सरपंच श्रीमती बृजबाई मरकाम तथा श्रीमती राजिन बाई कौशिक द्वारा विशेष सम्मान
ग्रामीणों की भारी उपस्थिति, युवाओं में उत्साह
धतुरा ग्राम के लिए यह क्षण स्वर्णिम इतिहास के रूप में दर्ज हो गया।
—
प्रेरणा का प्रतीक – शिक्षा, संघर्ष और सफलता की मिसाल
श्रीराम कौशिक की यह उपलब्धि न केवल धतुरा गांव बल्कि पूरे कोरबा जिले और छत्तीसगढ़ राज्य के लिए प्रेरणा है।
उनकी सफलता यह संदेश देती है कि—
> “यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो गाँव का एक साधारण युवा भी देश के सर्वोच्च मंच पर चमक सकता है।”