खरतोरा। ग्राम पंचायत खरतोरा में खेल मैदान पर बार-बार ताला लगाए जाने को लेकर बीते कई दिनों से तनाव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस भर्ती, सेना भर्ती और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी में जुटे बच्चों व युवाओं ने सुबह एक बार फिर मैदान के मुख्य गेट के सामने एकत्र होकर शांत लेकिन दृढ़ स्वर में विरोध दर्ज कराया। यह विरोध दूसरी बार हुआ, जो स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

सुबह अभ्यास के निर्धारित समय पर बच्चे और युवा जब मैदान पहुंचते हैं, तो गेट पर ताला लगा मिलता है। बच्चों का आरोप है कि यह निर्णय उनकी तैयारी, समय-सारिणी और कैरियर पर सीधा असर डाल रहा है। बच्चों ने सवाल उठाया—“चार वर्षों से मैदान बिना किसी समस्या के खुला रहता था, अब अचानक किसके दबाव में इसे बंद किया जा रहा है?”
विरोध में शामिल बच्चों के नाम भी सार्वजनिक रूप से सामने आए—जगेश्वर साहू, हेमन्त साहू, रोमन साहू, हेमन्त धीवर, खिलेंद्र विश्वकर्मा, अंकुर साहू, लाला साहू, पंकज साहू, रामकुमार यादव, खिलेंद्र साहू, नील सेन, खेलावन साहू—सहित बड़ी संख्या में बालक और बालिकाएँ इस आंदोलन में शामिल रहे। बच्चों और उनके अभिभावकों ने कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके भविष्य और अधिकारों से जुड़ा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान कई वर्षों तक उपेक्षा का शिकार रहा और यहां तक कि मैदान में गायों के बाड़े तक बने रहते थे। लेकिन पिछले वर्ष बच्चों ने अपने स्तर पर चंदा एकत्र कर मैदान को साफ-सुथरा बनाया, समतल कराया और खेल योग्य स्थिति में लाए। बच्चों का कहना है कि जब वे स्वयं मैदान को विकसित कर उपयोगी बना रहे हैं, तब बिना स्पष्ट कारण उसे बंद करना समझ से परे है।
युवाओं ने बताया कि उनका अभ्यास समय सुबह 5:00 से 6:30 बजे तक सीमित रहता है। मैदान का एक हिस्सा पहले से ही धान खरीदी केंद्र के लिए उपयोग हो रहा है, जिससे अभ्यास क्षेत्र काफी कम हो गया है। सड़क या खुली जगहों पर अभ्यास करने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए सुरक्षित वातावरण के लिए खेल मैदान अनिवार्य है।
कुछ दिन पहले ही जनपद सदस्य श्रीमती टिकेश्वरी वर्मा द्वारा बच्चों के लिए झूले, खेल सामग्री और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने की घोषणा ने क्षेत्र में उत्साह की लहर दौड़ाई थी। उनकी पहल की सराहना करते हुए राची फाउंडेशन ने भी आभार व्यक्त किया था। ग्रामीणों का कहना है कि जब क्षेत्र में बच्चों के लिए सुविधाएँ बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, तब मैदान पर ताला लगाए जाने को औचित्यहीन ठहराया जा रहा है।
अब बच्चों व अभिभावकों ने उच्च अधिकारियों, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से स्पष्ट जवाब मांगा है—“कौन चाहता है कि बच्चों का अभ्यास बंद हो? किसके दबाव में खेल मैदान को ताला लगाया जा रहा है?” उन्होंने कहा कि यह मामला केवल खेल का नहीं, बल्कि युवाओं के जीवन, अनुशासन और भविष्य से संबंधित है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह विरोध व्यापक रूप ले सकता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि मामले की गहन जांच कर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए, ताकि बच्चों को बिना बाधा अपने खेल और करियर की तैयारी करने का अधिकार मिल सके।