बलौदाबाजार, 5 दिसम्बर 2025/ उपभोक्ता संरक्षण आयोग बलौदाबाजार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए बीमा कंपनी को निर्देशित किया है कि वह विधवा आवेदिका को बीमा क्षतिपूर्ति राशि 5,00,000 रुपये सहित अन्य व्यय 45 दिनों के भीतर प्रदान करे। आयोग ने स्पष्ट रूप से माना कि बीमा दावा केवल विलंब के आधार पर निरस्त करना न्यायसंगत नहीं है।
क्या है मामला
भाटापारा निवासी रूखमणी यादव ने अपने पति के लिए द न्यू ओरियेंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, रायपुर से बीमा पॉलिसी ली थी। दुर्भाग्यवश उनके पति की मृत्यु करंट लगने से हो गई। नियमानुसार बीमा दावा प्रस्तुत करने के बावजूद बीमा कंपनी ने विलंब का आधार बनाकर राशि देने से मना कर दिया।
अपने अधिकारों से वंचित किए जाने पर आवेदिका ने उपभोक्ता आयोग में प्रकरण दर्ज कराया।
आयोग ने कंपनी को क्यों दोषी माना?
सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष छमेश्वर लाल पटेल एवं सदस्य हरजीत सिंह चांवला और शारदा सोनी ने पाया कि—
मृतक की मृत्यु के बाद भी बीमा कंपनी द्वारा प्रीमियम राशि काटी गई।
केवल विलंब के आधार पर दावा खारिज करना उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के अनुसार उचित नहीं है।
बीमा कंपनी द्वारा अनुचित व्यवहार व सेवा में कमी स्पष्ट रूप से सिद्ध होती है।
आयोग का फैसला
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि—
5,00,000 रुपये की बीमा राशि
निर्धारित अन्य व्यय
45 दिनों के भीतर विधवा को भुगतान किया जाए।
यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों और बीमा कंपनियों की जिम्मेदारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि क्लेम निपटान में अनुचित विलंब या मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी